भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute

कृषि मौसम सलाहकार

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in


साल-33, क्रमांक:-58/2026-27/सोम.                                                                                                                              समय: अपराह्न 2.30 बजे                                                                                     दिनांक: 19-10-2026

बीते सप्ताह का मौसम (13 से 19 अक्टूबर, 2026)

सप्ताहकेदौरानआसमान साफ़ रहा। 16 अक्टूबर, को 6.9 मिमी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 27.7 से 34.4 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 32.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 16.2 से 22.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 16.9 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 88 से 93 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 48 से 94 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 6.2 घंटे प्रतिदिन (साप्ताहिक सामान्य 6.8 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 2.1 कि.मी प्रतिघंटा (साप्ताहिक सामान्य 2.2 कि.मी प्रतिघंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.0 मि.मी (साप्ताहिक सामान्य 4.1 मि.मी) प्रतिदिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।


भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान
मौसमी तत्व/दिनांक 2026-10-202026-10-212026-10-222026-10-232026-10-24
वर्षा (मि.मी.) 0.00.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3233333434
न्यूनतम तापमान {°सेल्सियस}1819191919
बादलों की स्थिति (ओक्टा)22224
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम8585859090
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम5555556060
हवा की गति (कि.मी/घंटा)2015151015
हवा की दिशाउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर उत्तर पूर्व-उत्तर-पूर्व
साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)
विशेष मौसम

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 24 अक्टूबर, 2026 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • रबी की फसल की बुवाई से पहले किसान अपने-अपने खेतों को अच्छी प्रकार से साफ-सुथरा करें। मेड़ों, नालों,खेत के रास्तों तथा खाली खेतों को साफ-सुथरा करें ताकि कीटों के अंडे तथा रोगों के कारक नष्ट हो। 
  • तापमान को ध्यान में रखते हुए किसान सरसों की बुवाई कर सकते है। मिट्टी जांच के बाद यदि गंधक की कमी हो तो 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से अंतिम जुताई पर डालें। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें। उन्नत किस्में- पूसा विजय, पूसा सरसों-29, पूसा सरसों-30, पूसा सरसों-31। बीज दर– 1.5-2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड। बुवाई से पहले खेत में नमी के स्तर को अवश्य ज्ञात कर ले ताकि अंकुरण प्रभावित न हो। बुवाई से पहले बीजों को केप्टान @ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कम फैलने वाली किस्मों की बुवाई 30 सें. मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों की बुवाई 45-50 सें.मी. दूरी पर बनी पंक्तियों में करें। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सें.मी. कर ले। 
  • इस मौसम में किसान मटर की बुवाई कर सकते है। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें। उन्नत किस्में -पूसा प्रगति। बीजों को कवकनाशी केप्टान @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दें तथा अगले दिन बुवाई करें।
  • इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते है। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें। उन्नत किस्में- पूसा रूधिरा। बीज दर 2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें तथा खेत में देसी खाद, पोटाश और फाँस्फोरस उर्वरक अवश्य डालें। गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 1.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
  • इस मौसम में किसान इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली- जापानी व्हाईट, हिल क्वीन, पूसा मृदुला (फ्रेच मूली); पालक- आल ग्रीन,पूसा भारती; शलगम- पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म; बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; गांठ गोभी-व्हाईट वियना,पर्पल वियना तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें।
  • इस मौसम में ब्रोकली, फूलगोभी तथा बन्दगोभी की पौधशाला तैयार करने के लिए उपयुक्त है। पौधशाला भूमि से उठी हुई क्यारियों पर ही बनायें। जिन किसानों की पौधशाला तैयार है वह मौसस को ध्यान में रखते हुये पौध की रोपाई ऊंची मेड़ों पर करें।
  • मिर्च तथा टमाटर के खेतों में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। यदि प्रकोप अधिक है तो इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
  • इस मौसम में किसान धान के ब्लास्ट (बदरा) रोग का आक्रमण होने की निगरानी हर 2 से 3 दिन के अंतराल पर करें। इस रोग का सूचक है पत्तियों में एक छोटी आँख जैसा धब्बा जिसका अंदर का भाग हल्का भूरा और बाहर गहरे भूरे रंग का होता है। आगे जाकर अनेक धब्बे मिलकर एक बड़ा धब्बा बन जाता है।
  • इस मौसम में धान (पूसा सुगन्ध-2511) में आभासी कंड (False Smut) आने की काफी संभावना है। इस बीमारी के आने से धान के दाने आकार में फूल जाते है। इसकी रोकथाम के लिए ब्लाइटोक्स 50 की 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से आवश्यकतानुसार पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें।
  • किसान गुलाब के पौधों की कटाई-छटाई करें। कटाई के बाद बाविस्टीन का लेप लगाएं ताकि कवको का आक्रमण न हो। 
  • इस मौसम में गैदें की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें। किसान ग्लेडिओलस की बुवाई भी इस समय कर सकते है।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सुभाष नटराजा पिल्लै (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (परियोजना समन्वयक, मधुमक्खी पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना)

डा. दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा. ए. के. सिंह (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा. गोगराज सिंह जाट (वरिष्ठ वैज्ञानिक, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा. बिष्णु माया (वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)


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